
हिन्दी मासिक पत्रिका
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- कथालेख / अंक – 02 / फरवरी, 2023अनुक्रमणिका तुम ही दिल को तोड़ गये तुमने इश्क सिखाया मुझको और जगाया रातों में ।कितना इश्क छुपा है दिल में मुझे बताया बातों में ।।फिर भी कैसे बदल गयेContinue reading “कथालेख / अंक – 02 / फरवरी, 2023”
- कथालेख/ अंक – 01/ जनवरी, 2023अनुक्रमणिका
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रचनाओं की सूची
- दीवाना / शीला गौरभि
- संबंध सुहाना/ लीला तिवानी
- शीत ऋतु/ देवेंद्र देशज
- पैसा, माँ और मैं / गिरिराज पांडे
- मौन अखरता है / आलोकेश्वर चबडाल
- जाते हुए बरस से /नमिता गुप्ता ‘मनसी’
- खोजता हूँ / मदन मोहन शर्मा’सजल’
- महंगाई की मार /मुदित अग्रवाल बिसौली
- मोबाइल और बच्चे / डॉ राम शरण सेठ
- गाँव जा रहा हूँ / सुधिर भगत
- ये रिश्ते / अजित कुमार ‘कर्ण’
- आना तुम बनके बहार / अपराजिता रंजना
- पूर्णिका/सच्चिदानंद किरण
- निरूपम गाँव पुलासर /महावीर जोशी लेखाकार
- विस्तार / कवि यू एस बरी
- स्मृति मेरे गाँव की / सुभाष’ धूलमाटी’
- तुम और मैं / अनमोल दिवाकर
- जिस नगरी की गलियों में /त्रिशिका श्रीवास्तव ‘धरा’
- क्रोध/ नरेंद्र पाठक बिसौली
- हाँ प्राण तुझे चलना होगा / अशोक दीप
- नए वर्ष में एक आशा /महेश शर्मा
- इश्क़ (गज़ल) / मन्तशा शायरा
- मत बांटो इंसान को/ गोविंद सरावत मीना ‘गोविनी’
- धर्म की धारणा / गोपाल सिन्हा
- गूरू क्या होते हैं / इन्द्र जीत सिहाग
- प्रियपथिक / नमिता चौहान
- तुम और मैं संग संग / प्रवीण कुमार श्रीवास्तव
- वनप्रिया ने गाया गाना /शशिलता पाण्डेय
- क्रिसमस के रंग / सृष्टि देशमुख
- कृष्णा अर्जुन / अनामिका संजय अग्रवाल
परिचय
कथालेख : नवोदित रचनाकारों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आरम्भ की गई एक साहित्यिक, सामाजिक और सास्कृतिक और वेब पत्रिका है।
आधुनिक समय में बहुत अच्छे अच्छे कवि एवं लेखक हैं लेकिन उन सबका नाम हमें नही पता है क्योंकि आज के समय कवि का संसार social media तक सीमित हो गया जिसमें उसके सिर्फ परिचित ही सम्पर्क में है,अपने परिचित के बाहर उनकी काव्य पहचान न के बराबर है।
पुराने समय में मोबाइल/ लैपटॉप नहीं थे लेकिन काव्य की स्थिति पत्र पत्रिकाओं एवं प्रकाशित किताबों के माध्यम से चरम सीमा पर थी
आधुनिक समय में सुविधा के बावजूद भी कुछ नवोदित कवि अपने घर के गमले के पौधे बन कर रह जाते हैं कथालेख उन सभी कवियों / लेखकों को स्थान देकर गमले से एक बड़ा वृक्ष बनाने का प्रयास करेगा।
वैसे देखे तो आज के समय में साहित्य से संबंधित बहुत से वेबजाल बहुत अच्छा प्रयास कर रहे हैं तो उसी तरह कथालेख भी अब अपनी काव्य यात्रा अथवा इतिहास भव्य पन्नो पर उखेरना चाहेगा तो आइये मिलकर इसको आगे बढ़ाते हैं।
विचार क्यों आया?
संस्थापक
पढ़ने के शौकिन अग्यार’बिश्नोई’ को महसूस हुआ कि न जाने मेरे जैसे कितने और पाठक होंगे जो आर्थिक स्थिति के कारण किताबें/ पत्र-पत्रिकाओं को नही खरीद सकते मगर ऑनलाइन पढ़ने योग्य सामग्री जो इन्टरनेट पर उपलब्ध पढ़ सकते है तो क्यों न एक ऐसा मंच /वेबजाल तेयार किया जाए जिस पर हिन्दी भाषा की नयी रचनाएँ पढ़ने को मिल जाए और नवोदित कवियों को भी एक मंच मिल जाए जिससे वे अपनी रचना के प्रशंसा से प्रफुल्लित होकर और ज्यादा नवसृजन कर सके।
पहला अंक
जनवरी, 2023
उद्देश्य
- कथालेख का उद्देश्य हिंदी साहित्य को विश्व के हर कोने में सुलभ कराना है जिससे विश्व भर में फैले हिंदी प्रेमी अपनी सुविधानुसार इसका रसास्वादन और अध्ययन कर सकें।
- हिंदी साहित्य की लोकप्रियता को विश्व के समक्ष प्रस्तुत करना तथा नए लेखकों की रचनाएँ प्रकाशित कर के उन्हें प्रोत्साहित करना।
प्रत्याख्यान
- कथालेख पर प्रकाशित लेखों व रचनाओं के विचार कवियों और लेखकों के व्यक्तिगत विचार हैं। संपादक मंडल का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है।
- इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है।
- यह सूचना प्रत्येक पृष्ठ पर प्रकाशित कर दी गई है। इसके बाद भी यदि कोई सर्वाधिकार का दुरुपयोग करता है तो इसका उत्तरदायित्व और परिणाम पूरी तरह से दुरुपयोग करने वाले को भुगतना होगा।
ध्यान दें
साहित्य में हमारा भी जो थोड़ा बहुत अनुभव है उसके अनुसार नवोदित रचनाकार पढ़ना कोई नहीं चाहता किन्तु अपनी रचना पढ़ाना सब चाहते हैं ऐसे परिवेश में साहित्य का फलना फूलना संभव नहीं इसलिए आप सभी से निवेदन है सभी रचनाओं व् नियमों को पढ़ने की आदत डालें क्यूंकि जब आप किसी को नहीं पढ़ना चाहेंगे आपको कौन पढ़ेगा?? और क्यों पढ़ेगा??
इसलिए आप सभी से निवेदन है सभी रचनाकारों की रचनाएं पढ़ें और उनका उत्साहवर्धन भी करें।
विशेष सूचना
कथालेख किसी भी रचनाकार को किसी भी तरह की धन राशि देने का वादा नहीं करती, सभी रचनाकार अपनी स्वेच्छा से रचनायें भेजते हैं जिसके लिए उन्हें किसी किस्म का भुगतान नहीं किया जाता साथ ही साथ हम किसी भी रचनाकार से रचना प्रकाशित करने के लिए कोई धन राशि नहीं लेते, यह एक निशुल्क मंच है जिस पर योग्य रचनाकारों की स्वरचित रचनाओं को हम दुनिया भर के पाठक के सामने रखते हैं।
कॉपीराइट
© कॉपीराइट : सभी रचनाओं का कथालेख के पास संकलन की अनुमति है। इन रचनाओं का प्रयोग रचनाकारों (मूल लेखक) की अनुमति के बिना कहीं नहीं किया जा सकता।