कथालेख / अंक – 02 / फरवरी, 2023

आया है मधुमास

ऋतुराज ने दस्तक दे दी,शरद हुआ अवसान।
आओ करें अभिनंदन सब मिल, गाएं स्वागत गान।
मस्ती का हो गया है मौसम, खुशियाँ आयीं पास।
अमिय लुटाने को वसुधा पर, आया है मधुमास।

वृक्षों पर नूतन पत्तों की, नयी है कोपल आई।
हरीतिमा हर दिशा में छाई, पुष्पो पर तरुणाई।
मंद मंद कम होता जाता, सर्दी का संत्रास।
अमिय लुटाने को वसुधा पर, आया है मधुमास।

कुहू-कुहू का कुंजन करती, कोयल काली-काली।
पीत वसन ओढ़े इठलाती,सरसों की हर डाली।
सभी दिशाओं में अब होता बासंती आभास।
अमिय लुटाने को वसुधा पर, आया है मधुमास।

तितली नृत्य करें उपवन में, भंवरे करते गुंजन।
मलय पवन मस्ती में बहती, रोमांचित होता मन।
करें ज्ञान-बरसात शारदे माँ से है अरदास।
अमिय लुटाने को वसुधा पर, आया है मधुमास।

©विनय बंसल, 
आगरा
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