कथालेख / अंक – 02 / फरवरी, 2023

शीर्षक – बुजुर्ग



बुज़ुर्ग हमारे
विरासत की शान है।
हर कुटुम्ब
समुदाय की आन है।
जमाने से विस्मृत
करें ना इनको।
यही आदर्श
संस्कारों की खान है।

बुज़ुर्गों से नादान
बहुत कुछ सीखते हैं।
नूतन पीढ़ी को
संस्कारों से सींचते है।
छोटे परिवारों की
बढ़ती होड़ में देखों।
बचपन मासूमों का
हम भींचते है।

©महेन्द्र सिंह कटारिया “विजेता”
गुहाला,सीकर (राजस्थान)

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