कथालेख / अंक – 02 / फरवरी, 2023

रंगरसिया


कैसा किया इशारा खिल गयी मन की बगिया रे |
तन मन हुआ तुम्हारा सुन जा ओ रंग रसिया रे |

रंग सुबह के सूरज का चटकीला लागे रे |
रात का चंदा मोहक औ चमकीला लागे रे |
ना सुख चैन न निंदिया लागे कौन बीमारी रे |
लगी पिरितिया कहिके सारी सखियां भागे रे |

मैं बौरहिया का जानूं तू कहां का बसिया रे |
तन मन हुआ तुम्हारा सुन जा ओ रंग रसिया रे |

सावन बीता भादों बीता क्वार कतिकवा रे |
सूरत ना दिखलायी कइसन जरै दियरवा रे |
आगे शीत रहे सुसुवाई ठंडी बहै बतसवा रे |
तू ना अइहै तौ कस हमरा कटे फगुनवा रे |

अब तो पूरा करि जो हमको दिया दिलसिया रे |
तन मन हुआ तुम्हारा सुन जा ओ रंग रसिया रे |

डॉ. राज करन द्विवेदी
ई 76/20 सैनिकनगर
लखनऊ- 226029

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