रंगरसिया
कैसा किया इशारा खिल गयी मन की बगिया रे |
तन मन हुआ तुम्हारा सुन जा ओ रंग रसिया रे |
रंग सुबह के सूरज का चटकीला लागे रे |
रात का चंदा मोहक औ चमकीला लागे रे |
ना सुख चैन न निंदिया लागे कौन बीमारी रे |
लगी पिरितिया कहिके सारी सखियां भागे रे |
मैं बौरहिया का जानूं तू कहां का बसिया रे |
तन मन हुआ तुम्हारा सुन जा ओ रंग रसिया रे |
सावन बीता भादों बीता क्वार कतिकवा रे |
सूरत ना दिखलायी कइसन जरै दियरवा रे |
आगे शीत रहे सुसुवाई ठंडी बहै बतसवा रे |
तू ना अइहै तौ कस हमरा कटे फगुनवा रे |
अब तो पूरा करि जो हमको दिया दिलसिया रे |
तन मन हुआ तुम्हारा सुन जा ओ रंग रसिया रे |
डॉ. राज करन द्विवेदी
ई 76/20 सैनिकनगर
लखनऊ- 226029