ज़िन्दगी का एहसास
सनम तुम मुझे मिल गए होते !
कि दिल के कँवल खिल गए होते !!
मेरे ख़्वाब में तेरा चेहरा था !
कि होठों पे शब्दों का पहरा था !!
ये हर दिन कटे इंतज़ारों में !
चली रात मिलने सितारों में !!
मुहब्बत कभी तो करे होते !
शरारत से चाहत भरे होते !!
कि भंवरे से बनके चले आओ !
कभी गुल से मिलने चले आओ !!
वो धड़कन सुनी तेरे दिल की हैं !
शुरू उलझने अब मेरे दिल की हैं !!
कभी रूठ जाऊं मना लेना !
फिसल जाऊं तो फिर उठा लेना !!
करो चार आंखें मुहब्बत में !
मरो डूबकर मेरी उल्फ़त में !!
कवयित्री इच्छा पोरवाल
इटावा उत्तरप्रदेश