कथालेख / अंक – 02 / फरवरी, 2023

ज़िन्दगी का एहसास

सनम तुम मुझे मिल गए होते !
कि दिल के कँवल खिल गए होते !!

मेरे ख़्वाब में तेरा चेहरा था !
कि होठों पे शब्दों का पहरा था !!

ये हर दिन कटे इंतज़ारों में !
चली रात मिलने सितारों में !!

मुहब्बत कभी तो करे होते !
शरारत से चाहत भरे होते !!

कि भंवरे से बनके चले आओ !
कभी गुल से मिलने चले आओ !!

वो धड़कन सुनी तेरे दिल की हैं !
शुरू उलझने अब मेरे दिल की हैं !!

कभी रूठ जाऊं मना लेना !
फिसल जाऊं तो फिर उठा लेना !!

करो चार आंखें मुहब्बत में !
मरो डूबकर मेरी उल्फ़त में !!

कवयित्री इच्छा पोरवाल 
इटावा उत्तरप्रदेश
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