कथालेख / अंक – 02 / फरवरी, 2023

बसंती राग सुनाते हैं

ये शीतल मंद पवन
बसंती राग सुनाते हैं,
हिल-डुल के किसलय
झूम-झूम उल्लास मनाते हैं,
बसंती राग सुनाते हैं।

है धुली सुनहरी धूप राह में
अलि गुंजन करे बागों में,
ये पीत रंग संग प्रीत लिए
नए गीत मिलन के गातें हैं।

ये शीतल मंद पवन,
बसंती राग सुनाते हैं।
ना ठिठुरन है ना बेचैनी
प्राणी-प्राणी मुस्काते हैं।

कहीं कोयल कुहू करती है,
कहीं बाला श्रृंगार सजाती है।
वो काम देव बन वसंत दूत
यौवन जोग बढ़ाते है।

रति रस से भीगी आँचल से,
रंग रास का खूब चढ़ाते हैं।
ये शीतल मंद पवन,
बसंती राग सुनाते हैं।

-मोहित त्रिपाठी
(कवि, शिक्षक एवं समाजसेवी)
वाराणसी, उत्तर प्रदेश

Design a site like this with WordPress.com
Get started