कथालेख / अंक – 02 / फरवरी, 2023

अनुक्रमणिका तुम ही दिल को तोड़ गये तुमने इश्क सिखाया मुझको और जगाया रातों में ।कितना इश्क छुपा है दिल में मुझे बताया बातों में ।।फिर भी कैसे बदल गये तुम छोड़ मुझे तन्हाई में ।कौन किसे समझा है लेकिन चन्द सहज मुलाकातों में ।। हो कैसे निर्मम तुम मेरा ग़म से रिश्ता जोड़ गये।तुमनेContinue reading “कथालेख / अंक – 02 / फरवरी, 2023”

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